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आखिर क्यों मध्य प्रदेश की सियासत में जिंदा है विकास दुबे?

वैसे तो मोस्ट वांटेड अपराधी विकास दुबे कानपुर पुलिस के हाथों एनकाउंटर में मारा गया लेकिन अभी भी विकास दुबे मध्य प्रदेश की सियासत में सांसे ले रहे हैं, जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार में उज्जैन से विकास दुबे की हुई गिरफ्तारी का श्रेय लेने की कोशिश करी तो कांग्रेस की राजनैतिक विकास की उम्मीदें जाग गई,  शुरू हुई जुबानी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है राज्य में 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव तक शायद विकास दुबे को मध्य प्रदेश की सियासत में जिंदा ही रखा जाएगा।

दरअसल 8 पुलिसकर्मियों का हत्यारा विकास दुबे कानपुर से फरार तो वह कई राज्यों की पुलिस के लिए चुनौती बन बैठे तमाम घेराबंदी के बावजूद मध्यप्रदेश में अचानक उसका पहुंच जाना प्रशासन को अचंभे में दाल रहा है किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिस अपराधी को उत्तर प्रदेश की पुलिस हर रास्ते गली मोड़ पर ढूंढ रही थी वह अपराधी बड़े आराम से उज्जैन पहुंच गया आखिर उज्जैन पहुंचने में विकास दुबे की मदद किसने करी? यह अभी भी राज बना हुआ है।

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लेकिन एक बात का स्पष्टीकरण तो हो गया है की अनेक दावों के बावजूद पुलिस का खुफिया तंत्र फेल हो गया यह हैरान करने वाली बात है कि दिल्ली फरीदाबाद से लेकर उज्जैन तक के लंबे रास्ते में किसी की नजर उसके वाहन और उस पर नहीं गई, विकास उज्जैन में पकड़ा गया वह भी किसी पुलिसकर्मी के हाथों में नहीं बल्कि एक गार्ड के हाथों में जिसकी ड्यूटी यात्रियों की देखभाल करना और उन्हें रास्ता दिखाने की थी विकास जैसे भी पकड़ा गया हो लेकिन मध्य प्रदेश पुलिस के हाथ लग गया और एक तरह से राजनीति के विकास की नई इबारत लिखी जाने लगी।

जाहिर सी बात है विकास दुबे के पकड़े जाने के बाद सरकार अपनी बहादुरी दिखाने लगी इसीलिए बिना देर किए राज्य के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने मोर्चा संभाल लिया और पत्रकारों से कहा कि उनकी पुलिस ने बहादुरी का परिचय देते हुए विकास को गिरफ्तार कर लिया है जो उत्तर प्रदेश दिल्ली हरियाणा पुलिस तक से बस निकला था।

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उन्होंने पुलिस की बहुत तारीफ करी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी पुलिस की पीठ थपथपाई सत्ता से जुड़े अन्य कई नेताओं ने विकास की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को सम्मानित करने की घोषणा भी कर दी ऐसे में कांग्रेस कहां चुप बैठने वाली थी लंबे समय से सरकार के खिलाफ मुद्दे तलाश रही कांग्रेस ने बिना देर किए सरकार की घेराबंदी करना शुरू कर दिया, राज्य के गृह मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक निजी हमले शुरू हो गए बिना किसी स्वास्थ्य गृहमंत्री पर समर्पण की पृष्ठभूमि बनाने तक के आरोप लगने शुरू हो गए, मान हो जैसे बिना मेहनत किए कोई बड़ा मुद्दा मिल गया हो।

दिग्विजय सिंह कमलनाथ के साथ-साथ कांग्रेस के अन्य नेता भी समर्पण के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं मतलब साफ है कि इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश सरकार को किसी तरह की छूट नहीं मिलने वाली है उम्मीद है कि मध्य प्रदेश में होने वाले उपचुनाव तक ऐसा चलता रहेगा।

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