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Ram Mandir : PM Modi ने देशवाशियों को किया सम्बोधित, पढ़ें उनके भाषण की मुख्य बातें

आज का दिन ऐतिहासिक पन्नों में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी। 12 बज कर 44 मिनट पर चांदी की कन्नी से नींव डाली गई। इसके बाद प्रधानमंत्री ने देशवासियों को संबोधित किय। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति। इस चौपाई के जरिए उन्होंने शत्रुओं को संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि राम जी की यही नीति अब हिंदुस्तान की नीति है, हम जितने ताकतवर होंगे, उतनी ही शांति बनी रहेगी।

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भाषण की मुख्य बातें 

भारत की आस्था में राम, दिव्यता में राम, दर्शन में राम हैं। राम भारत की आत्मा हैं।

राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। आप भगवान राम की अद्भूत शक्ति देखिए, इमारतें नष्ट हो गईं। क्या कुछ नहीं हुआ, अस्तित्व मिटाने का हर प्रयास हुआ।  लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति के आधार हैं।

श्रीराम का मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा, हमारी शाश्वत आस्था का प्रतीक बनेगा, हमारी राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा और ये मंदिर करोड़ों-करोड़ लोगों की सामूहिक संकल्प शक्ति का भी प्रतीक बनेगा।

मुझे यहां आना ही था क्योंकि 'राम काज कीनु बिन मोहि कहां विश्राम।

तुलसी के राम सगुण राम हैं। नानक और कबीर के राम निर्गुण राम हैं। आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के रघुपति राम हैं।

भगवान श्रीराम का चरित्र और आदर्श ही महात्मा गांधी के रामराज्य का मार्ग है। राम आधुनिकता के पक्षधर हैं। राम की प्रेरणा के साथ भारत आज आगे बढ़ रहा है।

मुझे विश्वास है, हम सब आगे बढ़ेंगे, देश आगे बढ़ेगा। भगवान राम का ये मंदिर युगों-युगों तक मानवता को प्रेरणा देता रहेगा, मार्गदर्शन करता रहेगा।

इस मंदिर के बनने के बाद अयोध्या की सिर्फ भव्यता ही नहीं बढ़ेगी, इस क्षेत्र का पूरा अर्थतंत्र भी बदल जाएगा। यहां हर क्षेत्र में नए अवसर बनेंगे, हर क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे।

 पूरी दुनिया से लोग यहां आएंगे, पूरी दुनिया प्रभु राम और माता जानकी का दर्शन करने आएगी।

आज का ये दिन करोड़ों रामभक्तों के संकल्प की सत्यता का प्रमाण है। आज का ये दिन सत्य, अहिंसा, आस्था और बलिदान को न्यायप्रिय भारत की एक अनुपम भेंट है।

प्रभु श्रीराम ने हमें कर्तव्य पालन की सीख दी है, अपने कर्तव्यों को कैसे निभाएं इसकी सीख दी है, उन्होंने हमें विरोध से निकलकर, बोध और शोध का मार्ग दिखाया है, हमें आपसी प्रेम और भाईचारे के जोड़ से राममंदिर की इन शिलाओं को जोड़ना है।

अब हमें आगे बढ़ना है। देर नहीं करनी है। यही संदेश श्रीराम का आज के लिए है।

मेरा मानना है कि श्री राम के नाम की तरह अयोध्या में बनने वाला यह भव्य राम मंदिर भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को प्रतिबिंबित करेगा। मुझे विश्वास है कि यह पूरी मानवता को अनंत काल तक प्रेरित करेगा।

हमें ध्यान रखना है जब-जब मानवता ने राम को माना है विकास हुआ है, जब-जब हम भटके हैं विनाश के रास्ते खुले हैं। हमें सभी की भावनाओं का ध्यान रखना है। संकल्पशक्ति से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है।

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राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था। जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये स्वप्न साकार हो रहा है, जिनकी तपस्या राममंदिर में नींव की तरह जुड़ी हुई है, मैं उन सब लोगों को आज नमन करता हूं, उनका वंदन करता हूं।

आज पूरा भारत भावुक है सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है। करोड़ों लोगों को आज ये विश्वास ही नहीं हो रहा होगा कि वो अपने जीते-जी इस पावन दिन को देख पा रहे हैं। बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा।

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