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बाराबंकी : कहां गया करोड़ों रुपए का बाढ़ राहत का बजट

बाराबंकी में करीब 80 गांव बाढ़ की चपेट में 40000 जनसंख्या की आबादी प्रभावित

बाढ़ से पहले  मनरेगा में किया था काम लेकिन नहीं हुआ आज तक भुगतान, आखिर कौन खा गया बाढ़ से झूझ रहे ग्रामीणों का पैसा  

गांव के रहने वाले लोग पलायन करने को मजबूर अपना घर छोड़कर ऊंची जगह जाने को मजबूर

मुख्यमंत्री,योगी  सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री भी कर चुके हैं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा लेकिन उसके बाद भी नहीं निकल रहा है निष्कर्ष

बाराबंकी से श्रवण चौहान 

बाराबंकी जिले में घाघरा नदी की बाढ़ का संकट कम होंने का नाम नही ले रहा है। सिरौलीगौसपुर, रामनगर व रामसनेहीघाट तहसीलों के करीब 80 गांवों की 40 हजार से ज्यादा आबादी बाढ़ से प्रभावित है। रामनगर क्षेत्र में बाढ़ के पानी में डूबकर मंगलवार को दो लोगों की मौत हो भी गई थी। 15 हजार 346 पशुओं के लिए चारे का जबरदस्त संकट है। 12 लोगों के झोपड़ी वाले मकान भी बाढ़ में बह चुके हैं। 

महिलाओं को सौंच जाने में हो रही परेशानी 

आपको बता दें कि इसी का जायजा लेने के लिए हमारे संवाददाता श्रवण चौहान  जब जलमग्न हुए गांवो की जमीनी हकीकत जानने के पहुंचे तो उन्हें पानी में जा कर गांव का रास्ता तय करना पड़ा, उसके बाद उन्होंने गांव वालों से बात की । गांव वालों ने बताया कि गांव में बहुत सी समस्याएं हैं सबसे पहले महिलाओं को शौच जाने की समस्या है। महिलाओं को अगर शौच के लिए जाना होता है तो वह सबसे पहले नाव पर बैठकर 2 किलोमीटर दूर शौच के लिए जाती है उसके बाद महिलाएं उसी नाव से गांव वापस आती है । गांव वालों का कहना है कि जो प्रशासन की तरफ से नाव दी गई है वह टूटी है जिसके चलते नाव में पानी भर जाता है। 

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 गांव के रहने वाले 70 वर्ष के नाथूराम कहते हैं कि अगर पानी में जा कर जाए जाता है तो जोक चिपक कर खून पीने का काम करती हैं वही  पशुओं को चारा खिलाने के लिए भूसा उपलब्ध नहीं है। स्कूल में पानी भरा हुआ है अगर किसी को कोई सामान लेना है तो गांव से करीब 7 किलोमीटर दूर मरकामऊ बाजार जाना होता है। तहसील रामनगर के लहरा ग्राम पंचायत के चेचरी गांव के रहने वाले करीब 50 लोगों का आरोप है कि बाढ़ से पहले मनरेगा में काम तो किया गया लेकिन उन्हें उसका भुगतान अभी तक नहीं हुआ ।

 इस गांव में विधवा पेंशन बनवाने के नाम पर विधवा महिलाओं से कुछ लोगों ने मोटी रकम भी ले ली लेकिन उसके बावजूद भी विधवा महिलाओं की पेंशन नहीं बनी। महाराजा ने हमारे संवाददाता श्रवण चौहान से बातचीत करते हुए बताया कि साहब मैं तो विधवा पेंशन बनवाने के लिए 500 रूपये घूस भी दिया था लेकिन ना तो विधवा पेंशन बनी बल्कि 500 रूपये भी  चले गए। 

 कोरिनपुरवा मजरे तपेसिपाह, जैनपुरवा, मल्हानपुरवा, सिसौड़ा, लहडरा, ऐमा  हरिनारायणपुर बलईपुर, कोरियनपुरवा, तपेसिपाह, सिसौंडा, मल्लाहनपुरवा, लहडरा, दुर्गापुर, नामेपुर सिरौली, हेतमापुर, कंचनापुर ,लहरा, बुझावनपुरवा, चेचरी, इन गांवों में अधिकतर घर कच्चे बने हुए हैं इन लोगों को आज भी प्रधानमंत्री आवास का लाभ नहीं मिला है। वही बाढ़ राहत की अगर बात की जाए तो यहां पर शासन प्रशासन की तरफ से गांव वालों को अभी तक कुछ विशेष राहत सामग्री नहीं दी गई है जिससे वह बाढ़ से बच  सके। करीब 80 गांव के लोगों के पास खेती तो है लेकिन उनकी खेती पूरी तरीके से जलमग्न हो गई है जिसके चलते उनको अच्छा नुकसान आया है। 

वही के परेशान किसानों का कहना था कि मेंथा की फसल तो तैयार कर ली गई लेकिन समय से पहले बाढ़ आ जाने के चलते उनकी फसल जलमग्न हो गई कुछ किसानों का कहना था कि हमने तो धान की फसल लगा ली थी लेकिन जलमग्न होने के चलते वह फसल भी बर्बाद हो गई है यहां के किसान पूरी तरीके से बर्बाद है।  कैसे किसानों की आय दोगुनी होगी।  करीब 2 दर्जन से अधिक गांव में रहने वाले भोले भाले ग्रामीणों  का कहना था कि राजेश अवस्थी नाम के कोटेदार हम लोगों के मिलने वाले राशन में भी घंतौली करते हैं।

 एक व्यक्ति ने साफ तौर पर कहा कि 10 किलो मिलने वाला राशन 7 किलो ही होता है क्या करें साहब पूरी तरीके से भ्रष्टाचार फैला हुआ है। सतीश नन्हे लाल राजाराम रामचंद्र छोटे लाल समेत करीब 2 दर्जन से अधिक लोगों का कहना था कि हम लोग मनरेगा में काम किया था लेकिन अभी तक मनरेगा में काम करने वाले पैसे नहीं मिले। लोगों का कहना था कि फसल नष्ट हो गई है लेकिन किसी प्रकार की कोई राहत नहीं मिल रही है शासन-प्रशासन कोई मदद नहीं कर रहा है  गांव में शौचालय बने हैं लेकिन शौचालय पूरी तरीके से मानक विहीन बने होने के चलते गिर गए हैं शौचालय में पानी भरा हुआ है। अधिकतर लोगों को शौचालय मिले ही नहीं है। लहरा ग्राम पंचायत के चेचरी में मौजूद प्राथमिक विद्यालय में करीब 3 से 4 फीट पानी भरा हुआ है। लोगों का आरोप है कि इस ग्राम पंचायत की महिला ग्राम प्रधान आराधना पांडे पत्नी दिनेश पांडे को वोट देकर जिताया गया था लेकिन हम लोग इस हाल से जूझ रहे हैं लेकिन अभी तक प्रधान हालचाल लेने तक नहीं आई है।

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वहीं लोगों का यह भी कहना है कि यहां पर ना तो उपजिलाधिकारी आए हैं और ना ही जिला अधिकारी आए हैं  जो भी अधिकारी आते हैं वह बांध से फोटो खींच कर चले जाते हैं गांव की हालत बेकार है। गांव में पीने योग्य पानी नहीं है नल गंदे पानी में डूबे हुए हैं हम लोग अब राम भरोसे ही हैं। तो वही आपको हम बताते चलें कि इन तहसीलों में बाढ़ से बचने के लिए करोड़ों रुपए का बजट आता है लेकिन उसके बावजूद भी ग्रामीणों की समस्या हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बनी हुई है लेकिन इनकी समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हवाई निरीक्षण कर बाढ़ एरिया का जायजा ले चुके हैं तो वहीं सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री महेंद्र सिंह भी आकर लोगों से मिले हैं लेकिन फिर भी समस्या कम  नहीं हो रही हैं ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि कितनी जल्दी अधिकारी कर्मचारी इन ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हैं।

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