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क्या विकास दुबे के एनकाउंटर ने खामोश कर दिया कई राज़


कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों पर ताबड़तोड़ गोली चलाने वाला आरोपित विकास दुबे को पुलिस ने कानपुर लाते समय एनकाउंटर में मार गिराया था, मोस्ट वांटेड विकास दुबे को मध्य प्रदेश पुलिस ने उज्जैन से पकड़ा था, खबरों के मुताबिक एसटीएफ के काफिले की जिस गाड़ी में विकास दुबे बैठा हुआ था वह हादसे का शिकार होकर पलट गई थी .

विकास दुबे की गाड़ी पलटने का हादसा कानपुर से कुछ किलोमीटर पहले हुआ था, कानपुर के एसएसपी दिनेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया था " जैसे ही गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ विकास दुबे घायल पुलिसकर्मियों की पिस्तौल छीन कर भागने लगा उसे कई बार सरेंडर करने के लिए कहा गया लेकिन उसने फायरिंग शुरू कर दी जवाबी कार्यवाही में विकास दुबे को सीने और कमर में गोली लगी"

8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद फरार हुए गैंगस्टर विकास दुबे के इस तरीके से एनकाउंटर के बाद तमाम सवालात खड़े हो रहे थे, जिसमें  बड़ा सवाल यह था कि आखिर चप्पे-चप्पे पर कड़ी निगरानी होने के बाद भी आखिर कैस विकास दुबे कानपुर से फरार होकर उज्जैन तक पहुंचा?

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कैसे पहुंचा उज्जैन

विकास दुबे के फरार होने के बाद से हरियाणा के फरीदाबाद में विकास दुबे को देखें जाने के बाद वहां उसे तीन साथियों को गिरफ्तार किया गया था इनमें से एक प्रभात मिश्रा ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि 2 जुलाई की रात आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के तुरंत बाद विकास और उसने कानपुर के शिवाली कस्बे में एक रिश्तेदार के घर में पनाहा ली थी। 
दोनों शिवाली कस्बे में पूरे 2 दिन तक ठहरे आपकी जानकारी के लिए बता दें की शिवाली विकास दुबे के गांव से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठता है की घटनास्थल से 2 दिन तक इतने नजदीक रहने के बाद भी आख़िर क्यों एसटीएफ की टीम और 40 थानों की पुलिस विकास दुबे कि लोकेशन का पता नही लगा पाई ?

प्रभात के मुताबिक शिवली के बाद विकास एक ट्रक में सवार हो गया और 92 किलोमीटर की दूरी तय कर औरैया पहुंच गया. औरैया के बाद वह 385 किमी की दूरी तय करके हरियाणा के फरीदाबाद पहुंच गया. जहां एक होटल के सीसीटीवी कैमरे में उसकी तस्वीर देखी गयी.

होटल के सीसीटीवी में कैद होने के बाद हरियाणा पुलिस ने फरीदाबाद और पूरे राज्य की सीमाओं पर अलर्ट जारी कर दिया था आसपास के जिलों गौतम बुध नगर और गाजियाबाद में भी पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी थी जिससे वह एनसीआर के बाहर निकल ना पाए लेकिन इस सबके बावजूद विकास दुबे फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा पहुंच गया, नोएडा में विकास दुबे को ऑटो में बैठते और ऑटो से उतरते देखा गया।

विकास दुबे नोएडा होते हुए सड़क के रास्ते से कोरोना वायरस की वजह से मुस्तैद पुलिस को धता बताते हुए करीब 15 घंटे और 800 किमी का सफर तय कर मध्यप्रदेश के उज्जैन पहुंच गया जिसके बाद वह छह दिनों तक वह चार राज्यों में और कई दिनों तक उत्तर प्रदेश में ही घूमता रहा और इस दौरान उसने करीब 1300 किलोमीटर का सफर बाइक, ट्रक, कार और ऑटो से तय किया. लेकिन फिर भी उत्तर प्रदेश पुलिस की 100 टीमें और 75 जिलों की पुलिस उसे नहीं खोज पाई. गिरफ्तारी के दौरान की जो उसकी तस्वीरें मध्य प्रदेश पुलिस ने जारी की थीं, उनसे पता चलता है कि उसने अपना हुलिया भी नहीं बदला था. ऐसे में सवाल यह है कि उसे किसी नाके पर पहचाना क्यों नहीं करी जा सकी।

यह पूरा वाक्य सचमुच काफी हैरान कर देने वाला है खुद ब खुद सवाल खड़े कर देने वाला है यहां तक कि उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने भी एक निजि समाचार चैनल से बातचीत करते दौरान इस बात का जिक्र किया कि पूरा घटनाक्रम काफी हैरान कर देने वाला है पर सवाल यह है कि आखिर इतनी लंबी दूरी तय करके विकास दुबे पुलिस के सारे चक्रव्यू तोड़कर उज्जैन कैसे पहुंच गया, आखिर कैसे पुलिस पूरी तरह फेल कैसे हो गई?
और इससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई पुलिसकर्मी विकास दुबे को गाइड कर रहा था?

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महाकालेश्वर मंदिर से हुआ था गिरफ्तार

6 दिन उज्जैन में रहने के बाद महाकाल मंदिर में एक गार्ड ने विकास दुबे की पहचान करी थी गार्ड ने पुलिस को फोन कर उसे गिरफ्तार करवाया इससे पहले विकास दुबे ने अपने नाम से मंदिर में वीआईपी दर्शन की पर्ची कटवाई और महाकाल मंदिर के अंदर प्रवेश किया जब मंदिर के गार्ड ने पुलिस को विकास दुबे की जानकारी दी तो पुलिस मंदिर के बाहर ही विकास दुबे का इंतजार करती है, और बाहर आने के बाद उसको गिरफ्तार कर लेती है, विकास दुबे की गिरफ्तारी भी वहाँ की लोकल पुलिस करती है विकास की गिरफ्तारी के लिए किसी एसटीएफ एटीएफ या कंमंडो की ज़रूरत नही पड़ती है, इससे सवाल यह खड़ा होता है कि देश अपराधी को तीन राज्य की पुलिस तमाम नाकाबंदी करने के बाद भी नहीं पकड़ पाई उसे इतनी आसानी से लोकल पुलिस ने कैसे गिरफ्तार कर लिया?

इन सवालों को लेकर कई जानकारों का यह कहना है कि पुलिस भले ही कहे कि उन्होंने विकास दुबे को पकड़ा है लेकिन यह पूरी तथा योजना के साथ किया गया समर्पण था डीजीपी विक्रम सिंह कहते हैं , ‘वह एक बेहद शातिर दिमाग अपराधी था, अगर उसे केवल समर्पण करना होता तो यह यूपी में भी कर सकता था लेकिन उसे मालूम था कि यहां उसका एनकाउंटर कर दिया जाएगा... इसलिए उसने ऐसी सेफ जगह चुनी जहां उसे लगा कि शायद उसका एनकाउंटर नहीं हो सकता था.’

एनकाउंटर की कहानी पर उठे कई सवाल

विकास दुबे के एनकाउंटर की जो कहानी यूपी पुलिस सुना रही है उस पर भी बहुत बड़े सवाल खड़े हो रहे कई लोगों को एनकाउंटर फर्जी होने का शक है अगर पूरे मामले को शुरू से देखें तो उज्जैन पुलिस ने विकास दुबे को यूपी एसटीएफ के हाथों में सौंपा था एसटीएफ के करीब 15 जवान 3 गाड़ियों में उसे कानपुर लेकर आ रहे थे कई न्यूज चैनलों कि टीमें भी उज्जैन से एसटीएफ की गाड़ियों के पीछे आ रही थी एक निजी न्यूज़ चैनल की टीम का कहना है कि कानपुर की सीमा में घुसने से कुछ दूर पहले ही एसटीएफ वालों ने मीडिया की गाड़ियों को रोक दी जिसको लेकर एसटीएफ की टीम से मीडिया वालों की कहासुनी भी हो गई थी।

बाद में जब मीडिया वालों को आगे जाने का रास्ता दिया गया तो एसटीएफ के काफिले की एक गाड़ी पलटी मिली और पता लगा कि विकास दुबे का एनकाउंटर हो गया है उस वक्त घड़ी की सुई समय 7:15 बता रही थी।

पुलिस द्वारा किए गए एनकाउंटर पर एक और बात भी सवाल उठाती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उज्जैन से यूपी एसटीएफ की टीम विकास दुबे को टाटा सफारी कार में लेकर चली थी. इसके बाद रास्ते में कई जगहों पर उसे सफारी में बैठे देखा गया था. यहां तक कि कानपुर से पहले झांसी टोल प्लाजा पर भी वह टाटा सफारी में ही बैठा था.

लेकिन, पुलिस की जिस गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ है, वह टाटा सफारी नहीं बल्कि महिंद्रा टीयूवी है. पुलिस का कहना है कि विकास टीयूवी में ही बैठा था और गाड़ी का एक्सीडेंट होने के बाद उसने पुलिसकर्मी की पिस्तौल निकालकर भागने की कोशिश की थी

विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद कई जानकारों और विपक्षी पार्टियों का कहना था कि विकास से पूछताछ की जाए तो बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे क्योंकि बीते 6 दिनों का पूरा खेल और उसके बाद उसका उज्जैन में पकड़ा जाना समझ से परे है लेकिन विकास दुबे के खामोश होने के साथ ही हर सवाल का जवाब भी खामोश हो गया है।

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