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जानिए कब से शुरू है पितृपक्ष और कौन सी तिथि किस दिन है और कैसे करे श्राद्धकर्म-

हर साल हिन्दू धर्म में पितरो के तर्पण के लिए पितृपक्ष में कई अनुष्ठान और हवन किये जाते है जिससे पूर्वजो को तृप्ति मिलती है|आज हम आपको बताने जा रहे है कि कैसे पितरो का तर्पण करे और किस प्रकार कोरोना काल में घर बैठे श्राद्ध विधि की जाये| आइये सबसे पहले जानते है कि किस दिन कौन से तिथि पड़ रही है-   

1 सितम्बर - पूर्णिमा
2 सितम्बर-  पूर्णिमा/ प्रतिपदा
3 सितम्बर - प्रतिपदा
4 सितम्बर- द्वितीया
5 सितम्बर - तृतीया
6 सितम्बर- चतुर्थी
7 सितम्बर - पंचमी
8 सितम्बर - षष्ठी
9 सितम्बर - सप्तमी
10 सितम्बर - अष्टमी
11 सितम्बर - नवमी/ मातृनवमी
12 सितम्बर - दशमी
13 सितम्बर - एकादशी
14 सितम्बर - द्वादशी
15 सितम्बर - त्रयोदशी
16 सितम्बर - चतुर्दशी
17 सितम्बर - अमावस्या / सर्वपितृ अमावस्या 

क्यों किया जाता है श्राद्ध कर्म- 

पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज स्वर्गलोक से धरती पर आते हैं| पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज 15 दिन तक घर में रहते है तथा अपने लिए की गयी तर्पण विधि से वह तृप्त हो कर सर्व पितृ अमावस्या को स्वर्गलोक वापस चले जाते है तथा अपनी पीढ़ियो को आशीर्वाद दे कर जाते है| हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि जिन प्राणियों की मृत्यु के बाद उनका विधिनुसार तर्पण नहीं किया जाता है उनकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है| पितृपक्ष में पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने का विशेष महत्व होता है| जो भी अपने पितरों को तर्पण नहीं करता है उन्हें पितृदोष का सामना करना पड़ता है| ऐसे दोष की स्थिति में परिजनों को धन, सेहत के हानि और अन्य कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है| 

पितृ पक्ष के दौरान ये चीजें होती है वर्जित-
पितृ पक्ष में चना, मसूर, बैंगन, हींग, शलजम, मांस, लहसुन, प्याज और काला नमक भी नहीं खाया जाता है|

इन चीजो से किया जाता है तर्पण- 
पितृपक्ष के दौरान काले तिल, फूल, गंगाजल, दूध से पूरे पितृपक्ष के दौरान तर्पण किया जाता है| 

कोरोना काल के दौरान ऐसे करे तर्पण-
क्योंकि अब कोरोना काल चल रहा है इसलिए अब समस्या यह है कि ऐसे में पितरो का तर्पण कैसे किया जाये तो इस समस्या के लिए एक उपाय यह है कि आप घर पर रह के ही तर्पण करे|

पितृ पक्ष में वर्जित होते है ये काम-
शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में तर्पण और श्राद्ध से पितरों को मुक्ति मिलती है| यही कारण है कि इस दौरान तर्पण और श्राद्ध कार्य विधिपूर्वक और श्रध्दा भाव से करें| इस दौरान कई ऐसे काम होते है जो पितृपक्ष में वर्जित होते है| वह है- 
- अगर आपको अपने पूर्वज की मृत्यु की तिथि याद नहीं है तो कर लें, तो आप सर्वपितृ अमावस्या पर उनका श्राद्ध करे|  
- इस दौरान आपके द्वार पर कोई आये तो उसका अनादर नहीं करें. हालांकि, कोरोना और लॉकडाउन के चलते दूरी जरूर बना कर रखें|
- पितृ पक्ष के अंतिम दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाना न भूलें|
- पितृ पक्ष के आखिरी दिन भी तर्पण जरूर करना चाहिए, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए|
- पितृ पक्ष में तर्पण करने वाले को पितृपक्ष के दौरान अपनी दाढ़ी और बाल नहीं बनवाने चाहिए| ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वज नाराज हो सकते हैं|
- मातृनवमी वाले दिन महिलाओ का श्राद्ध किया जाता है इसलिए इस दिन महिलाओ का श्राद्ध करना चाहिए|    

पितृपक्ष में इन चीजो का लगता है भोग-
पितृपक्ष में कद्दू, पूरी तथा खीर का भोग लगाया जाता है| इस दिन बनाया गया खाना सात्विक यानि बिना लहसुन प्याज का होना जरुरी होता है|

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