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बेरोज़गारी (घटती वैकेंसी, परेशान युवा)

दोस्तों कोई भी देश तरक्की तभी कर पता है जब उस देश का युवा रोज़गार प्राप्त कर ले, और आत्मनिर्भर हो| पर अगर यही युवा बेरोजगार हो तो कोई देश कैसे तरक्की कर सकता है| हम बात कर रहे है आज की युवा पीढ़ी की| जी हाँ वही युवा पीढ़ी जो किसी भी देश की नींव होती है| 

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आज भारत का युवा बेरोजगार है और अपनी रोजी - रोटी के लिए दर दर भटक रहा है| छात्रों जो ये सोच के उच्च शिक्षा प्राप्त करते है कि उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद अच्छी नौकरी मिलेगी पर आज हमारे देश की हालत इतनी ख़राब है कि आज की युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी रोज़गार प्राप्त करने के बाद नौकरी के लिए दर दर भटक रही है| सबसे बड़ी बुरी हालत तो लॉकडाउन लगने के बाद हुई है| जो युवा छोटी मोटी नौकरी कर भी रहे थे उनको नौकरी से निकाल दिया गया है तथा जो किसी कंपनी में काम कर भी रहे है उनको या तो फरवरी से सैलरी नही मिली है या जिनको मिली भी है उनकी भी सैलरी काट के दी जा रही है|
मै पूछना चाहती हूँ सरकार आखिर कर क्या रही है? भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लॉकडाउन लगाने के बाद ये ऐलान किया था कि कोई भी कंपनी अपने यहाँ के कर्मचारी की तनख्वाह न काटे तथा अपने यहाँ काम करने वाले किसी भी कर्मचारी को बिना वजह नौकरी से ना निकाले लेकिन सरकार ने जो ऐलान किया क्या उस पर सरकार ने कोई सुध ली कि क्या उनके आदेशों का पालन हो रहा है? क्या सरकार ने कोई कमेटी बनायीं जो इस बात की जांच करे की कंपनियां अपने यहाँ काम करने वाले कर्मचारी को टाइम से सैलरी दे रही है या नही या कोई कंपनी अपने यहाँ के कर्मचारी को फालतू निकाल तो नही रही है|
अब बात करते है लघु उद्योगों को चलाने वालो या छोटे दुकानदार की| छोटा दुकानदार जो भी समान मंगाता है उस पर माल भाड़ा बढ़ा दिया है जिससे हर प्रकार की वस्तुओ का दाम बढ़ गया है| लॉकडाउन के कारण 2.5 से 3 महीने सभी दुकाने बंद रही जिससे छोटे दुकानदार वैसे भी अपनी रोजी रोटी का मुश्किल से इन्तेजाम कर पा रहे है| अब अगर उनके पास खाने का पैसा नही है तो वो बड़ा हुआ माल भाड़ा कहाँ से देगा उसके अलावा सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में बिजली के दाम बढ़ा दिए है जिससे आम आदमी वैसे भी अपनी रोजीरोटी का इन्तेजाम मुश्किल से कर पा रहा था वो अब इतने बढ़ी हुई बिजली की दर कहाँ से देगा? इसके अलावा जो 2.5 से 3 महीने दुकानदारों की दुकाने बंद रही उस पर भी सरकार द्वारा दुकानदारों को उन 3 महीनो का बिजली का बिल थमा दिया गया| अब सरकार से सवाल ये उठता है कि जब सरकार जानती थी कि छोटे दुकानदार की रोजी रोटी ठप पढ़ी है तो क्या सरकार उन दुकानदारों का 3 महीने का बिजली का बिल माफ़ नही कर सकती थी? क्या सरकार को दुकानदारों की कोई चिंता नही?
 
 
अब बात करे मजदूरों की या गरीब तबके के व्यक्ति की, उनको सरकार ने हर महीने में दो बार फ्री राशन देने का ऐलान किया जिसमे गेहूँ,चावल सम्मिलित था | पर क्या ये काफी है? क्या केवल गेहूं और चावल से मजदूर या गरीब तबके के व्यक्ति का जीवन यापन संभव है? क्या सरकार ने इन मजदूरों और गरीब तबके के व्यक्तियों के व्यक्ति के रोजगार का कोई इन्तेजाम किया? क्या केवल गेहूँ और चावल से उनका पूरा जीवन यापन होगा| अगर कोई गरीब तबके का व्यक्ति स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हो तो वो अपना इलाज़ कैसे कराएगा तथा गरीब तबके का व्यक्ति रहेगा क्या और अपनी बाकी जरूरते कैसे पूरी करेगा?
 
सरकार बड़े बड़े वादे कर रही है कि हमने ये किया वो किया वो क्या जमीनी स्तर पर वो काम हुआ? क्या सरकार ने खुद इस बाद की समीक्षा की कि जो काम वो कह रही है क्या वो पुरे हुए?        
 
 

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