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अगर विकास दुबे का एनकाउंटर ना होता तो क्या होता?

मोस्ट वांटेड आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारा विकास दुबे का एनकाउंटर तो पुलिस ने कर दिया लेकिन अब विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं कुछ लोग यूपी पुलिस को दबंग बता रहे हैं, वही कुछ लोग इसको फेक एनकाउंटर भी बता रहे हैं और बोले भी क्यों ना पुलिस की एनकाउंटर स्टोरी आखिर है ही इतनी फिल्मी ।

अब ऐसे में आम जनता के दिमाग में कई तरीके के सवाल घूम रहे हैं जैसे क्या विकास दुबे के इस एनकाउंटर ने लोकतंत्र का एनकाउंटर कर दिया है? 
अगर हर फैसला पुलिस लेगी तो तमाम कोर्ट कचहरीओ का क्या काम है ?
वही कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि अगर पुलिस विकास दुबे का एनकाउंटर ना करती तो क्या होता ?

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लेकिन इन सबसे भी एक सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है जिसका जवाब जानना आपके लिए बेहद जरूरी है कि आखिर क्यों विकास दुबे इतने सालों में कभी दबोचा नहीं गया आखिर विकास दुबे को कौन बचाता रहा ।

इस सवाल का जवाब विकास दुबे के इतिहास से शुरू करें विकास दुबे उस वक्त सामने आया था जब यूपी में जाति का राजनीति में बड़ा किरदार माना जाता था, वोट जाती के आधार पर पड़े जाते थे आज भी कहीं ना कहीं यह कुछ चीजें देखने को नजर आती हैं,विकास दुबे ब्राह्मण समाज का था ब्राह्मण काफी उच्च जाति के माने जाते हैं विकास दुबे जिस गांव में रहता था उस गांव के साथ-साथ आसपास के 3 गांव में ब्राह्मण की संख्या बहुत ज्यादा थी।

विकास दुबे  का 1990 में पहला केस निकल के सामने आता है उसके बाद 1993 तक विकास कर ऊपर किडनैप फिरौती जैसे कई मामले दर्ज हो जाते है लेकिन उसका कोई बाल भी बाका नही कर पाता आखिर क्यों क्योंकि विकास दुबे बीजेपी से बसपा में पहुँचे नेता हरिकिशन श्रीवास्तव के वोट बैंक बन चुके थे।

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और कुछ समय बाद विकास दुबे भी बसपा को ज्वाइन कर के डिस्टिक लेवल इलेक्शन पर जीत हासिल करते है जिसके  बाद वो अपनी पत्नी रिचा को भी इलेक्शन में खड़ा करता है। विकास दुबे अपने इलाके में लगभग एक लाख वोटर्स को अपना वोट बैंक बना कर रखता थे यह एक बहुत बड़ी वजह है विकास दुबे के ऊपर राजनीतिक पार्टियों का हाथ बना रहता था, केवल बीजेपी बसपा ही नहीं विकास दुबे का अन्य राजनीतिक पार्टियों में भी नाम शामिल था।

अब बात करते हैं अगर विकास दुबे ने सरेंडर कर दिया था तो उसका एनकाउंटर करने की जरूरत क्या थी दरअसल विकास दुबे ने एक बार पहले भी आत्मसमर्पण किया है जब उसने बीजेपी के नेता को गोली मार दी थी लेकिन उसके बाद सरकार बदल गई और विकास दुबे के खिलाफ कोई गवाह ना होने के कारण उसको छोड़ दिया गया।

ऐसा ही कुछ दृश्य इस वक्त भी हो सकता था अगर विकास दुबे का एनकाउंटर ना किया जाता है हो सकता है सरकार बदल जाती और विकास दुबे एक बार फिर से छूट जाता लेकिन कहानी में मोड़ भी है विपक्ष सवाल उठा रहा है कि विकास दुबे के कई राजनैतिक और अफसरों के साथ संबंध थे पुलिस ने फेक एनकाउंटर इसलिए किया की कहीं यह राज  खुल न जाए ।

अब किसकी बात में कितना सच है इसका तो दावा नहीं किया जा सकता, एनकाउंटर सही था या गलत ,होना चाहिए था या नही हमको कमेंट कर के ज़रूर बताए।

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