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कभी दिल्ली पुलिस में कॉन्सटेबले रहे थे राकेश टिकैत, आखिर क्यों छोड़ी नौकरी 

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत किसान आंदोलन  की शुरुवात से ही चर्चा में हैं।  आइये जानते हैं कि कौन हैं किसान नेता राकेश टिकेत,  जिनकी एक आवाज पर किसान जीने-मरने पर उतारू हो जाते हैं। मुजफ्फरनगर जनपद के सिसौली गांव में 4 जून 1969 में जन्में राकेश टिकैत के पास उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन के मुखिया हैं।

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 दिन था 4 जून 1969 जब मुजफ्फरनगर जनपद के सिसौली गांव में देश के जाने-माने किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत का जन्म हुआ था  राकेश टिकैत ने मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई करने के बाद एलएलबी भी किया है। राकेश टिकैत की शादी वर्ष 1985 में बागपत जिले के दादरी गांव की सुनीता देवी से हुई थी। इनके एक पुत्र चरण सिंह दो पुत्री सीमा और ज्योति हैं। इनके सभी बच्चों की शादी हो चुकी है। मौजूदा समय में  राकेश टिकैत  उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन के मुखिया हैं।


देश के जाने-माने किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत कई दशकों से किसानों के  हकों की लड़ाई के लिए सक्रिय हैं।  बताया जाता है कि किसानों के अधिकार की लड़ाई के चलते राकेश टिकैत 44 बार जेल जा चुके हैं। यह तक की मिली जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश में भूमि अधिकरण कानून के खिलाफ हुए आंदोलने के चलते राकेश टिकैत को 39 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। तो वहीँ कुछ साल पहले दिल्ली में संसद भवन के बाहर किसानों के गन्ना मूल्य बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने पर  उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। 

राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजीत सिंह ने वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अमरोहा सीट से राकेश टिकैत को लोकसभा प्रत्याशी बनाया था। जहा  उन्हें हार मिली थी । राकेश टिकैत वर्ष 1992 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर नौकरी करते थे, वर्ष था 1993-1994 जब  दिल्ली के लाल किले पर पिता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन चल रहा था | 

राकेश टिकैत पर सरकार ने आंदोलन खत्म कराने का दबाव बनाया। साथ ही कहा कि वह अपने पिता और भाइयों को आंदोलन खत्म करने को कहें,लेकिन राकेश टिकैत पर पिता महेंद्र सिंह टिकैत का प्रभाव इस कदर था कि  जिसके बाद राकेश टिकैत ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी और  किसानों के साथ खड़े हो गए थे। इसके बाद पिता महेंद्र सिंह टिकैत की कैंसर से मृत्यु के बाद राकेश टिकैत ने पूरी तरह भारतीय किसान यूनियन (BKU) की कमान संभाल ली। 

बालियान खाप से संबंध रखने वाले महेंद्र सिंह टिकैत की मौत के बाद उनके बड़े बेटे नरेश टिकैत को भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाया गया। इसके पीछे वजह यह है कि बालियान खाप के नियमों के मुताबिक, बड़ा बेटा ही मुखिया हो सकता है। ऐसे में नरेश टिकैत अध्यक्ष हैं, लेकिन कहा जाता है कि भारतीय किसान यूनियन की कमान राकेश टिकैत के हाथ में है और सभी अहम फैसले राकेश टिकैत ही लेते हैं।  सच्चाई यही है कि नरेश टिकैत अध्यक्ष तो राकेश भारतीय किसान यूनियन का राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।

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 बता दें कि भारतीय किसान यूनियन की नींव 1987 में उस समय रखी गई थी। इस संगठन ने बिजली के दाम को लेकर किसानों ने शामली जनपद के करमुखेड़ी में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन किया था। इस दौरान हुई हिंसा में किसान जयपाल और अकबर पुलिस की गोली मर गए थे। इसके बाद भारतीय किसान यूनियन का गठन हुआ और अध्यक्ष बने चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत।

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